योग गुरु रामदेव की बनाई औषधियों के क्लीनिकल ट्रायल करने को लेकर राजस्थान सरकार ने निम्स विश्वविद्यालय से जवाब मांगा था. सरकार को जवाब देते हुए निम्स विश्वविद्यालय ने कहा है कि हमने कुछ औषधियों का क्लीनिकल ट्रायल 1 महीने तक कोरोना वायरस पर किया है.
कोरोनिल की टेस्टिंग को लेकर निम्स यूनिवर्सिटी ने सरकार से कहा कि यूनिवर्सिटी में 23 मई से लेकर 20 जून तक गिलोय, अश्वगंधा और तुलसी कोरोना के गैर लक्षण वाले मरीजों को दिया गया था, जिसका उद्देश्य किसी तरह की कोई दवा बनाने या फिर कोरोना के इलाज करने का नहीं था.
विश्वविद्यालय ने कहा कि हमने एक पायलट ट्रायल किया था, जिसमें किसी तरह का कोई टेबलेट नहीं दिया था. विश्वविद्यालय की तरफ से यह भी कहा गया कि 4 जून को राजस्थान सरकार को इसकी सूचना दे दी गई थी कि हम यहां पर आयुर्वेद की औषधियों का ट्रायल कर रहे हैं. जहां तक परमिशन की बात है इसके बारे में हमें इसकी जानकारी नहीं है.
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निम्स विश्वविद्यालय ने दवा के क्लीनिकल ट्रायल से पल्ला झाड़ते हुए साफ कह दिया है कि हमने इसका ट्रायल किसी भी तरह के दवाई बनाने और उत्पादन करने के लिए नहीं किया था. यह हमारे रिसर्च के लिए था.
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सीएमएचओ नरोत्तम शर्मा के अनुसार विश्वविद्यालय के जवाब हमने राजस्थान सरकार को भेज दिए हैं. जहां तक 3 दिनों के अंदर जांच के रिजल्ट की बात है तो चीफ हेल्थ ऑफिसर ने कहा कि ऐसा निम्स में नहीं किया जा सकता, क्योंकि रिपोर्ट सीएमएचओ के जरिए ही जाती है.
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शरत कुमार